
शहर-ऐ-दिल की रौनक ले गया कोई,
कुछ सूखे फूल, चंद लम्हे दे गया कोई!
क्या क़यामत सी थी उसकी तसल्लियाँ भी,
मुसलसल बेकरारिया दे गया कोई...
मुसलसल - continuous
वो हैं खुशबू किसी दिल-ऐ-चमन की,
हमे तो बेयाबा कर गया कोई....
चलो माना कोई मरता नहीं जुदाई मैं,
सांसें हैं मगर, जिंदगानी ले गया कोई!
भागती ही रहती है यह ज़िन्दगी भी 'आलम'
थक सा गया हूँ, पर नींदे ले गया कोई !!
आलम सीतापुरी... :)
कुछ सूखे फूल, चंद लम्हे दे गया कोई!
क्या क़यामत सी थी उसकी तसल्लियाँ भी,
मुसलसल बेकरारिया दे गया कोई...
मुसलसल - continuous
वो हैं खुशबू किसी दिल-ऐ-चमन की,
हमे तो बेयाबा कर गया कोई....
चलो माना कोई मरता नहीं जुदाई मैं,
सांसें हैं मगर, जिंदगानी ले गया कोई!
भागती ही रहती है यह ज़िन्दगी भी 'आलम'
थक सा गया हूँ, पर नींदे ले गया कोई !!
आलम सीतापुरी... :)
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