Thursday, May 21, 2009

निशानियाँ.....



शहर-ऐ-दिल की रौनक ले गया कोई,
कुछ सूखे फूल, चंद लम्हे दे गया कोई!

क्या क़यामत सी थी उसकी तसल्लियाँ भी,
मुसलसल बेकरारिया दे गया कोई...
मुसलसल - continuous

वो हैं खुशबू किसी दिल-ऐ-चमन की,
हमे तो बेयाबा कर गया कोई....

चलो माना कोई मरता नहीं जुदाई मैं,
सांसें हैं मगर, जिंदगानी ले गया कोई!

भागती ही रहती है यह ज़िन्दगी भी 'आलम'
थक सा गया हूँ, पर नींदे ले गया कोई !!

आलम सीतापुरी... :)
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Friday, February 27, 2009

ख्वाहिश..

वो भी क्या क़यामत की घडी होगी ,
आलम-ऐ-ख्वाब की सूरत जब रू-ब-रू होगी.
(क़यामत - doomsday, आलम-ऐ-ख्वाब- dream face, रू-ब-रू- Infront)

कब तक निहा रखेंगे वो हाल-ऐ-दिल हमसे,
ज़प्त-ऐ- मोहब्बत की भी एक इन्तहा होगी.
(निहा- Disguise, ज़प्त-ऐ- मोहब्बत- disguising one's love, इन्तहा-limit )

माना हैं अंजान कायद-ऐ-हुस्न से मगर,
उनके इशारों की भी कोई जुबां होगी .
(कायद-ऐ-हुस्न - Rules of Beauty, जुबां - language)

न तो मौसम , न सोहबत-ऐ-रिंदा की ज़रुरत,
अब तो हर वक़्त उनकी नज़रो से मयकशी होगी.
(सोहबत-ऐ-रिंदा- company of drinkers, मयकशी - drinking liquior)

निकले न गर अल्फाज़ उनकी सूरत देखकर ,
मेरी हालत ही मेरी मोहब्बत की ज़ुबानी होगी.
(अल्फाज़- words, - हालत- condition, ज़ुबानी- narration)

गम न कर ज़िन्दगी के अँधेरे हैं फानी,
काली रात के बाद सुबह ज़रूर होगी .
(फानी - going to be last soon )

सबको मिले उनके मंजिल 'आलम'
अब तेरे दिल की येही दुआ होगी.
(दुआ - Desire)

आलम सीतापुरी॥ its me :)

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