वो भी क्या क़यामत की घडी होगी ,
आलम-ऐ-ख्वाब की सूरत जब रू-ब-रू होगी.
(क़यामत - doomsday, आलम-ऐ-ख्वाब- dream face, रू-ब-रू- Infront)
कब तक निहा रखेंगे वो हाल-ऐ-दिल हमसे,
ज़प्त-ऐ- मोहब्बत की भी एक इन्तहा होगी.
(निहा- Disguise, ज़प्त-ऐ- मोहब्बत- disguising one's love, इन्तहा-limit )
माना हैं अंजान कायद-ऐ-हुस्न से मगर,
उनके इशारों की भी कोई जुबां होगी .
(कायद-ऐ-हुस्न - Rules of Beauty, जुबां - language)
न तो मौसम , न सोहबत-ऐ-रिंदा की ज़रुरत,
अब तो हर वक़्त उनकी नज़रो से मयकशी होगी.
(सोहबत-ऐ-रिंदा- company of drinkers, मयकशी - drinking liquior)
निकले न गर अल्फाज़ उनकी सूरत देखकर ,
मेरी हालत ही मेरी मोहब्बत की ज़ुबानी होगी.
(अल्फाज़- words, - हालत- condition, ज़ुबानी- narration)
गम न कर ज़िन्दगी के अँधेरे हैं फानी,
काली रात के बाद सुबह ज़रूर होगी .
(फानी - going to be last soon )
सबको मिले उनके मंजिल 'आलम'
अब तेरे दिल की येही दुआ होगी.
(दुआ - Desire)
आलम सीतापुरी॥ its me :)
Please do write your comments at the end.. will be a great feedback for me.
आलम-ऐ-ख्वाब की सूरत जब रू-ब-रू होगी.
(क़यामत - doomsday, आलम-ऐ-ख्वाब- dream face, रू-ब-रू- Infront)
कब तक निहा रखेंगे वो हाल-ऐ-दिल हमसे,
ज़प्त-ऐ- मोहब्बत की भी एक इन्तहा होगी.
(निहा- Disguise, ज़प्त-ऐ- मोहब्बत- disguising one's love, इन्तहा-limit )
माना हैं अंजान कायद-ऐ-हुस्न से मगर,
उनके इशारों की भी कोई जुबां होगी .
(कायद-ऐ-हुस्न - Rules of Beauty, जुबां - language)
न तो मौसम , न सोहबत-ऐ-रिंदा की ज़रुरत,
अब तो हर वक़्त उनकी नज़रो से मयकशी होगी.
(सोहबत-ऐ-रिंदा- company of drinkers, मयकशी - drinking liquior)
निकले न गर अल्फाज़ उनकी सूरत देखकर ,
मेरी हालत ही मेरी मोहब्बत की ज़ुबानी होगी.
(अल्फाज़- words, - हालत- condition, ज़ुबानी- narration)
गम न कर ज़िन्दगी के अँधेरे हैं फानी,
काली रात के बाद सुबह ज़रूर होगी .
(फानी - going to be last soon )
सबको मिले उनके मंजिल 'आलम'
अब तेरे दिल की येही दुआ होगी.
(दुआ - Desire)
आलम सीतापुरी॥ its me :)
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