
One of the finest Nazms by Ahmed Nadeem Quasmi Shahab!!
रेत से बुत न बना ए मेरे अच्छे फनकार!!
(फनकार: artist)
एक लम्हे को ठहर, मैं तुझे पत्थर ला दूँ
मैं तेरे सामने अम्बार लगा दूँ लेकिन
कौन से रंग का पत्थर तेरे काम आयेगा
सुर्ख पत्थर जिसे दिल कहती है बेदिल दुनिया
या वो पत्थराई हुई आँख का नीला पत्थर
जिस में सदीयों के तहय्युर के पड़े हों डोरे
(तहय्युर : astonishment)
क्या तुझे रूह के पत्थर की ज़रूरत होगी
जिस पे हक बात भी पत्थर की तरह गिरती है
इक वो पत्थर है जिसे कहते हैं तहजीब-ऐ-सफ़ेद
उस के मर-मर में सियाह खून झलक जाता है
इक इन्साफ का पत्थर भी तो होता है मगर
हाथ में तेशा-ऐ-ज़र हो तो वो हाथ आता है
(तहजीब-ऐ-सफ़ेद: culture of the elite class; तेशा-ऐ-ज़र
: power of money)
जितने माय्यार हैं इस दौर के सब पत्थर हैं
शेर भी रक्स भी तस्वीर-ओ -घिना भी पत्थर
मेरे इल्हाम तेरा ज़हन ऐ रसा भी पत्थर
इस ज़माने में हर फन का निशाँ पत्थर है
हाथ पत्थर हैं तेरे तेरी जुबां पत्थर है
(मेयार : paradigms; इल्हाम : inspiration)
रेत से बुत न बना ए मेरे अच्छे फनकार!!
Ahmed Nadeem Qasmi


