अहमद नदीम कासमी :One of the most prominent poet of Urdu world। Gulzar Sahab consider him as his his spritual guru and mentor. He mourned his death telling, “I lost my spiritual guru whom I called Baba” . Here is one of the finest classical gazal from this great poet ...Enjoy the various unsaid feminine signs of love!!
तुझे इज़हार-ऐ मुहब्बत से अगर नफरत है,
तूने होंटों को लरज़ने से तो रोका होता
बे-नियाजी से, मगर कांपती आवाज़ के साथ,
तूने घबरा के मेरा नाम न पूछा होता
तेरे बस में थी अगर मशाल-ऐ-जज़्बात की लौ,
तेरे रुखसार में गुलज़ार न भड़का होता
यूँ तो मुझसे हुई सिर्फ़ आब-ओ हवा की बातें,
अपने टूटे हुए फिकरों को तो परखा होता
यूँही बेवजह ठिठकने की ज़रूरत क्या थी,
दम-ऐ रुखसत मैं अगर याद न आया होता
तेरा घम्माज़ बना ख़ुद तेरा अंदाज़-ऐ-खिराम,
दिल न संभला, तो क़दमों को संभाला होता
अपने बदले मेरी तस्वीर नज़र आ जाती,
तूने उस वक़्त अगर आईना देखा होता
हौसला तुझ को न था मुझ से जुदा होने का,
वरना काजल तेरी आंखों में न फैला होता
~~अहमद नदीम कासमी ~~
1 comment:
कासमी साहेब कि बहोत खूबसूरत ग़ज़ल लगायी आप ने , शुक्रिया
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