Wednesday, July 2, 2008

उसके पहलू से...



उसके पहलू से लग के चलते हैं
हम कहीं टालने से टलते हैं !!

मैं उसी तरह तो बहलता हूँ
और सब जिस तरह बहलते हैं !!

वोह है जान अब हर एक महफिल की
हम भी अब घर से कब निकलते हैं !! (my fav)

क्या तक़ल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी खुश है, हम उस से जलते हैं !! (my fav)

है उसे दूर का सफर दरपेश ,
हम संभाले नहीं संभलते हैं !!

है अजब फैसले का सेहरा भी
चलना पड़िये तो पाँव जलते हैं !! (my fav)

हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद ,
देखने वाले हाथ मलते हैं !! (my fav)

तुम बनो रंग, तुम बनो खुश्बू
हम तो अपने सुखन में ढलते हैं !! (my fav) ()
~~जान एलिया~~

2 comments:

डॉ .अनुराग said...

क्या तक़ल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी खुश है, हम उस से जलते हैं !!

है उसे दूर का सफर दरपेश ,
हम संभाले नहीं संभलते हैं !!

है अजब फैसले का सेहरा भी
चलना पड़िये तो पाँव जलते हैं !!



.भाई वाह....ये शेर सीधे दिल में उतर गये...यार बहुत अच्छा लिखते हो वाकई....

रंजू भाटिया said...

हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद ,
देखने वाले हाथ मलते हैं

आपके पास तो अनमोल खजाना है जी ...बहुत सुंदर