
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं ,
की छू रहा हूँ तुझे, और पिघल रहा हूँ मैं | (my fav)
तुझी पे ख़त्म है जानां मेरी ज़वाल की रात,
तू अब तुलु भी हो जा, की ढल रहा हूँ मैं | (my fav)
(ज़वाल : nadir; तुलु : appearing)
बुला रहा है मेरा जामा-जेब मिलने को
तो आज पैरहन-ऐ-जान बदल रहा हूँ मैं |
(पैराहन-ऐ-जान: clothes of the soul)
घुबार-ऐ-रहगुज़र का ये हौसला भी तो देख,
हवा-ऐ-ताज़ा! तेरे साथ चल रहा हूँ मैं |
(घुबार-ऐ-रहगुज़र : dust of the path; हवा-ऐ-ताज़ा : fresh breeze)
मैं ख्वाब देख रहा हूँ के वो पुकारता है ,
और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं | (my fav)
~~इरफान सिद्दीकी~~
5 comments:
bhut khub. likhate rhe.
घुबार-ऐ-रहगुज़र का ये हौसला भी तो देख,
हवा-ऐ-ताज़ा! तेरे साथ चल रहा हूँ मैं |
(घुबार-ऐ-रहगुज़र : dust of the path; हवा-ऐ-ताज़ा : fresh breeze)
मैं ख्वाब देख रहा हूँ के वो पुकारता है ,
और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं |
sab sher apne aap me mukammAL hai kisko kisko behtareen kahe...lajavaab...
kya baat hai!!
shero shayari can b so meaningful!!! :D
seems like shayar khud m khud sama gaye hai apni lines mein...wah wah...kya baat hai ..kya baat hai!! :D
बेहतरीन कलेक्शन है आपके पास .. किसी एक को अच्छा कहना मुश्किल होगा ..पढ़वाते रहे शुक्रिया
शाएरी का बहूत उम्दः कलेक्शन है आप के पास - शुक्रिया
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