Tuesday, June 3, 2008

चन्द अशार - जौन आलिया

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है मुहब्बत हयात की लाज़त
वरना कुछ लाज़त -ऐ -हयात नही,
गर इजाज़त हो एक बात कहूं, वो ..........
मगर खैर कोई बात नही !
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शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी... नाज़ से काम क्यू नही लेती,
वो, आप, जी, मगर... ये सब क्या है? तुम मेरा नाम क्यू नही लेती!
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मैंने हर बार उससे मिलते वक्त, उससे मिलने की जुस्तजू की है,
और उसके जाने के बाद भी, उसके खुशबु से गुफ्तगू की है |
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