~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
है मुहब्बत हयात की लाज़त
वरना कुछ लाज़त -ऐ -हयात नही,
गर इजाज़त हो एक बात कहूं, वो ..........
मगर खैर कोई बात नही !
~~~~~~
शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी... नाज़ से काम क्यू नही लेती,
वो, आप, जी, मगर... ये सब क्या है? तुम मेरा नाम क्यू नही लेती!
~~~~~~
मैंने हर बार उससे मिलते वक्त, उससे मिलने की जुस्तजू की है,
और उसके जाने के बाद भी, उसके खुशबु से गुफ्तगू की है |
~~~~~~
Tuesday, June 3, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment