मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है
मगर उस ने मुझे चाहा बहुत है
खुदा इस शहर को महफूज़ रखे
ये बच्चों की तरह हंसता बहुत है
मैं हर लम्हे में सदियाँ देखता हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है
वो अब लाखों दिलों से खेलता है
मुझे पहचान ले, इतना बहुत है
~~ Bahir Badar
Tuesday, June 3, 2008
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