Monday, June 23, 2008

तुझे खो कर भी तुझे पाऊँ...



Excellent imagination of the Shayar !!

तुझे खो कर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ ,
हुस्न-ऐ-याज्दान से तुझे हुस्न-ऐ-बुतां तक देखूँ |
(हुस्न-ऐ-याज्दान : beauty of God; हुस्न-ऐ-बुतां : beauty of idols)

तूने यूं देखा है जैसे कभी देखा ही न था,
मैं तो दिल में तेरे क़दमों के निशाँ तक देखूँ | (my fav)

सिर्फ़ इस शौक़ में पूछी हैं हजारों बातें ,
मैं तेरा हुस्न, तेरे हुस्न-ऐ-बयान तक देखूँ |

वक़्त ने जेहन में धुंधला दिए तेरे खद्दा-ओ-खाल,
यूं तो मैं टूटते तारों का धुंआ तक देखूँ |
(खद्दा-ओ-खाल : appearence)

दिल गया था तो ये आँखें भी कोई ले जाता, (my fav)
मैं फ़क़त एक ही तस्वीर कहाँ तक देखूँ |

एक हकीक़त सही फिरदौस में हूरों का वजूद, (too gud!! love it)
हुस्न-ऐ-इंसान से निपट लूँ तो वहाँ तक देखूँ !!
(फिरदौस : paradise)

~~अहमद नदीम कासमी ~~

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