रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ ,
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
(रंजिश : animosity)
पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म -ओ -रहे दुनिया ही नीभाने के लिए आ
(मरासिम : relationship; रस्म -ओ -रहे दुनिया : manners, tradi ns of the world)
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम ,
तू मुझ से खफा है तो ज़माने भी लिए आ !
(सबब - reason)
कुछ तो मेरे पिन्न्दार -ऐ -मुहब्बत का भरम रख ,
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ !
(पिन्न्दार-ऐ-मुहब्बत : love’s pride)
एक उम्र से हूँ लाज्ज़त-ऐ-गिरिया से भी महरूम ,
ऐ राहत-ऐ- जान मुझको रुलाने के लिए आ |
(उम्र : ages; लाज्ज़त -ऐ गिरिया : joy of crying; महरूम : devoid; राहत-ऐ-जान : comfort of the soul)
अब तक दिल-ऐ-खुश-फ़हम को तुझ से हैं उम्मीदें,
ये आखरी शम्में भी बुझाने के लिए आ |
(दिल-ऐ-खुश-फ़हम : understanding/gullible heart; उम्मीदें : hopes; शम्में : lights)
~~अहमद फ़राज़~~
The following ashaar were written by Talib Baghpati but Mehdi Hassan sings them as part of this Ghazal.
माना की मुह्हबत का छुपाना है मुहब्बत,
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ |
(रोज़ : day)
जैसे तुझे आते हैं न आने के बहाने,
ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिए आ |
(बहाने : excuses)
Click here to listen this Gazal sung by Mehndi Hassan in a live concert.. need some patience :)
No comments:
Post a Comment