Sunday, June 8, 2008

देखते हैं....



सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं ,
सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं |

सुना है रब्त है उस को ख़राब हॉलों से,
सो अपने आप को बरबाद करके देखते हैं| (my fav)
(रब्त : closeness)

सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ऐ-नाज़ुक उसकी ,
सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं |
(चश्म -ऐ -नाज़ुक : delicate eyes; गाहक : customer)

सुना है उस को भी है शेर -ओ -शायरी से शाघाफ़,
सो हम भी मोजज़े अपने हुनर के देखते हैं|(my fav)
(शाघाफ़ : interest; मोजज़े : miracles)

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं,
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं |

सुना है रात उसे चाँद ताकता रहता है ,
सितारे बाम -ऐ -फलक से उतर कर देखते हैं (my fav)
(बाम -ऐ -फलक : terrace of the horizon)

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं ,
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं |

सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं,
सो हम बहार पर इल्जाम धर के देखते हैं |

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं ,
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं |

सुना है उस की सियाह चाश्मगी क़यामत है,1
सो उस को सुर्माफरोश आह भर के देखते हैं|
(सुर्माफरोश : kohl vendors)

सुना है हश्र हैं उस की गजाल सी आँखें,
सुना है उस को हिरन दस्त भर के देखते हैं |

सुना है आईना तम्साल है जबीन उसकी,
जो सादा दिल हैं उसे बन संवर के देखते हैं |

सुना है उस के बदन के तराश ऐसे हैं,
के फूल अपनी क़बायें कतार के देखते हैं |
(क़बायें : tunic)

सुना है उस के शबिस्तां से मुत्तासिल है बहिश्त,
मकीं उधर के भी जलवे इधर के देखते हैं |
(शबिस्तान: bedroom; मुत्तासिल : near; मकीं : tenant)

रुके तो गर्दिशें उस का तवाफ करती हैं ,
चले तो उस को ज़माने ठहर के देखते हैं|
(गर्दिश : time)

किसे नसीब के बे-पैरहन उसे देखे ,
कभी कभी दर-ओ-दीवार घर के देखते हैं|
(बे-पैरहन: without clothes)

कहानियां ही सही सब मुबालागे ही सही,
अगर वो ख्वाब है तो ताबीर कर के देखते हैं |
(मुबालागे : beyond one’s limits)

बस एक निगाह से लुटता है काफिला दिल का,
सो रह-रवां -ऐ -तमन्ना भी धर के देखते हैं |
(रह -रवां : travellers)

सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की
सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं |
(काकुल : tresses)

अब उस के शहर में ठहरें की कूच कर जाएं,
“फ़राज़” आओ सितारे सफर के देखते हैं |

~~ अहमद फ़राज़~~

Enjoy Narration from Faraz Sahab himself in a Mushyara..

2 comments:

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

इस प्यारी गजल को पढवाने का शुक्रिया।

Aashish said...

सुना है जो कुछ नहीं करते कमाल करते है
चलो इस हुनर को भी आजमा के देखते है .

dear mohit, good work on the blog. ek kaam karo 'surma-farosh' should be 'coal/kajal' vendor na ki kohl...sher ki ghrai mein jao..aankhon se babasta hai. anyway bahut accha laga. btw oopar wala sher 'bakalam khud' hai...ksisa raha;-)