Wednesday, June 4, 2008

जी चाहता है..


जी चाहता है फलक पे जाऊं ,
सूरज को घुरूब से बचाऊँ !
(फलक : vault of heaven; घुरूब : ebb)

बस मेरा चले जो गर्दिशों पर,
दिन को भी न चाँद को बुझाऊँ !
(गर्दिश : time)

मैं छोड़ के सीधे रास्तों को ,
भटकते हुए नेकियां कमाऊँ !

मैं शब के मुसाफिरों की खातिर ,
मशाल न मिले तो घर जलाऊँ !

अशार हैं मेरे इस्तियारे ,
आओ तुम्हें आईने दिखाऊँ !
(इस्तियारे : hope)

यूं बाँट के बिखर के रह गया हूँ ,
हर शख्स मैं अपना अक्स पाऊँ !(my fav)

आवाज़ जो दूँ किसी के दर पर,
अन्दर से भी ख़ुद निकल के आऊँ !(my fav)

हर ज़बर पे सब्र कर रहा हूँ ,
इस तरह कहीं उजर न जाऊं !

रोना भी तर्ज़ ऐ गुफ्तुगू है ,
आँखें जो रुकें तो लब हिलाऊँ! (my fav)

ख़ुद तो “नदीम ” आजमाया ,
अब मर के खुदा को आज़माऊँ !

~~अहमद नदीम कासमी ~~
Enjoy this Gazal in voice of Nadeem Kasmi sir;

4 comments:

डॉ .अनुराग said...

आवाज़ जो दूँ किसी के दर पर,
अन्दर से भी ख़ुद निकल के

सुभान अल्लाह...क्या खूब कहा है....बहुत उम्दा

सागर नाहर said...

बहुत खूब.. एक से एक लाजवाब।

हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, आप हिन्दी में बढ़िया लिखें और खूब लिखें यही उम्मीद है।

॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

कुश said...

रोना भी तर्ज़ ऐ गुफ्तुगू है ,
आँखें जो रुकें तो लब हिलाऊँ!

क्या खूब कहा है...

शोभा said...

जी चाहता है फलक पे जाऊं ,
सूरज को घुरूब से बचाऊँ !
(फलक : vault of heaven; घुरूब : ebb)

बस मेरा चले जो गर्दिशों पर,
दिन को भी न चाँद को बुझाऊँ !
(गर्दिश : time)
बहुत बढ़िया।